बंगाल चुनाव से पहले चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, 40 से ज्यादा अफसरों का तबादला

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शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर पुलिस महकमे तक व्यापक फेरबदल, राजनीतिक माहौल गरमाया
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद निर्वाचन आयोग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य में व्यापक फेरबदल किया है। अब तक 40 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से हटाया या स्थानांतरित किया जा चुका है, जिसे लेकर अब राजनीतिक गलियारे में भी हड़कंप मचा हुआ है।
राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पदों से हटाकर चुनाव से जुड़े कार्यों से दूर कर दिया गया है। उनकी जगह दुश्मंता नरिवाला को नया मुख्य सचिव और संगमित्रा घोष को गृह सचिव नियुक्त किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर इतनी तेजी से बदलाव को राज्य के इतिहास में दुर्लभ माना जा रहा है।
यह कार्रवाई केवल शीर्ष अधिकारियों तक सीमित नहीं रही। पुलिस विभाग में भी बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), कानून-व्यवस्था के महानिदेशक, दक्षिण बंगाल के अतिरिक्त महानिदेशक और उत्तर बंगाल के महानिरीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को बदला गया है। इसके साथ ही बैरकपुर, हावड़ा, आसनसोल और चंदननगर जैसे प्रमुख शहरों के पुलिस आयुक्तों का भी स्थानांतरण किया गया है।
क्षेत्रीय स्तर पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिला है। मुर्शिदाबाद, बर्दवान, प्रेसिडेंसी रेंज, रायगंज और जलपाईगुड़ी के पांच डीआईजी को हटाया गया है, जबकि कूचबिहार, बीरभूम, हुगली ग्रामीण, मालदा और पूर्व-पश्चिम मेदिनीपुर समेत 12 जिलों के पुलिस अधीक्षकों का तबादला किया गया है। साथ ही 15 आईपीएस अधिकारियों को अन्य राज्यों में चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक मोर्चे पर भी इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने जहां चुनावी जीत का दावा किया है, वहीं ममता बनर्जी ने आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम बीजेपी के इशारे पर उठाया गया है। वहीं बीजेपी ने चुनाव आयोग के इस फैसले का समर्थन किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने के लिए ऐसे कदम जरूरी थे।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य केवल स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करना है। आयोग के अनुसार, इन बदलावों से प्रशासनिक निष्पक्षता बनी रहेगी और मतदाताओं का भरोसा मजबूत होगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले हुआ यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और चुनावी रणनीतियों पर गहरा असर डाल सकता है।

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