शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में अवैध उत्खनन से दहले जंगल

शिवपुरी

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मशीनों की गड़गड़ाहट से जंगल छोड़ने को मजबूर वन्यजीव, खनन माफिया के आगे नतमस्तक फॉरेस्ट अमला?
रशीद खान

शिवपुरी। जिले के वन परिक्षेत्र पिछोर की रिजर्व फॉरेस्ट की वनभूमि में इन दिनों अवैध उत्खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। सूत्रों के अनुसार राजापुर की चौखट खदान एवं मायापुर की कोलुघाट और सुलार घाटी ,सहित कई वन क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में अवैध खदानें संचालित हो रही हैं, जहां फर्शी पत्थर का खुलेआम खनन किया जा रहा है। भारी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लगातार आवाजाही से जंगल का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और वन्यजीवों का पलायन बढ़ रहा है।।

 

जानकारी के मुताबिक वन चौकी राजपुर के अंतर्गत रिजर्व फॉरेस्ट में इन दिनों जमकर अवैध खनन कर खदानों का सीना छलनी किया जा रहा है बता दे कि
झलकुई सबरेंज कि भेड़ा कि झिरिया वन क्षेत्र में प्रतिदिन 50 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां फर्शी पत्थर भरकर निकाली जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे गोरखधंधे में विभागीय मिलीभगत भी सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि इस सब गोरख धंधे का मास्टर माइंड डिप्टी मुंशीलाल यादव संबंधित रेंजर , सहित बीट गार्ड बलवंत कुशवाहा की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। वही सूत्रों माने तो एक अधिकारी के प्राइवेट ड्राइवर सहित सभी इस खेल में एजेंट का रोल अदा कर रहे है।

उड़न दस्ते की कार्रवाई पर उठे सवाल

बताया जा रहा है कि समय-समय पर उड़न दस्ता क्षेत्र में पहुंचता तो है, लेकिन उससे पहले ही रेंजर और बीट गार्ड को सूचना मिल जाती है। नतीजा खनन कार्य अस्थायी रूप से बंद करा दिया जाता है और मौके पर कोई गतिविधि नहीं मिलती। इससे उड़न दस्ते की कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

जंगल में अब नहीं दिखते वन्यजीव

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछोर के जंगलों में अब वन प्राणियों की चहल-पहल कम हो गई है। जहां पहले वन्यजीव नजर आते थे, वहां अब अवैध हथियार से लैस माफिया व उनके वाहन जैसे जेसीबी,एलएनटी मशीन, ट्रैक्टर दौड़ते दिखते हैं। मशीनों की गड़गड़ाहट और लगातार खनन से वन क्षेत्र की हरियाली और वन जीव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

एसी चेंबर तक सीमित अधिकारी?

आरोप है कि जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारी जमीनी हकीकत देखने के बजाय दफ्तरों तक सीमित हैं। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में वन क्षेत्र को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या संज्ञान लेता है और अवैध उत्खनन पर कब तक प्रभावी कार्रवाई होती है।

इनका कहना है
कार्यवाही जारी है अभी टेक्टर भी जप्त किये है। और आपने बताया है तो ओर संज्ञान में लेकर कार्यवाही करेंगे। अभी केन्वाया में भी हमारे द्वारा पत्थर तोड़ा गया है।
आदित्य सांडिल्य SDOF

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