महाराष्ट्र,
महाराष्ट्र(HRIDAY STAMBH);
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए (FDA) के आयुक्त और अपने सख्त प्रशासनिक रुख के लिए चर्चित आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे ने खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बेहदहम और आँखें खोल देने वाला बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर साझा किए गए एक संदेश के जरिए आम जनता को आगाह किया है कि खान-पान की गुणवत्ता को लेकर समाज में जो आम धारणाएं बनी हुई हैं, वे पूरी तरह भ्रामक साबित हो सकती हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि खाने की सुरक्षा सिर्फ उसकी कीमत, बड़े ब्रांड, चमक-दमक या इस बात से तय नहीं होती कि आप अब तक बीमार क्यों नहीं पड़े।
आईएएस तुकाराम मुंडे ने अपने संदेश में मुख्य तौर पर चार ऐसी लोकप्रिय अवधारणाओं और मिथकों पर बड़े सवाल उठाए हैं, जिन पर आम इंसान आंख मूंदकर भरोसा करता है। सबसे पहले उन्होंने महंगे खान-पान के ढेरों दावों को खारिज करते हुए कहा कि लोग यह मानकर चलते हैं कि अगर वे किसी खाद्य पदार्थ के ज्यादा पैसे चुका रहे हैं, तो उसकी गुणवत्ता बेहतरीन होगी, जबकि कीमत इस बात की कोई गारंटी नहीं देती कि वह उत्पाद हानिकारक रसायनों या मिलावट से पूरी तरह सुरक्षित है। इसके बाद उन्होंने बड़े और प्रतिष्ठित ब्रांड्स की विश्वसनीयता पर भी बात करते हुए स्पष्ट किया कि विज्ञापनों की चमक और बड़े नाम देखकर लोग शुद्धता का भरोसा तो कर लेते हैं, लेकिन कई बार ये बड़े उत्पाद भी तय सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते।
मुंडे ने बाजार में मिलने वाले ताजे और आकर्षक दिखने वाले भोजन को लेकर भी गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जो फल, सब्जियां या अन्य खाद्य पदार्थ दिखने में बहुत ज्यादा ताजे और चमकदार नजर आते हैं, उन्हें सुंदर दिखाने के लिए कई बार खतरनाक केमिकल्स, कृत्रिम रंगों या वैक्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर के लिए धीमे जहर का काम करते हैं। इसके अलावा उन्होंने सबसे बड़े और खतरनाक भ्रम पर प्रहार करते हुए कहा कि लोगों की यह सोच कि वे लंबे समय से किसी विशेष दुकान या ब्रांड का खाना खा रहे हैं और उन्हें कभी फूड पॉइजनिंग या कोई बड़ी दिक्कत नहीं हुई, इसलिए वह खाना पूरी तरह सुरक्षित है, बिल्कुल गलत है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई हानिकारक तत्व शरीर में धीरे-धीरे जमा होते रहते हैं और गंभीर बीमारियां वर्षों बाद सामने आती हैं।
आईएएस तुकाराम मुंडे का यह संदेश सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं को यह सोचने पर मजबूर करता है कि वे अपनी सेहत के साथ किस तरह का समझौता कर रहे हैं। उनका स्पष्ट संदेश है कि भोजन की सुरक्षा उसके दाम या उसके ब्रांड से नहीं बल्कि उसके कड़े गुणवत्ता और स्वास्थ्य मानकों से तय होती है। आज के दौर में मिलावट, प्रिजर्वेटिव्स का अंधाधुंध इस्तेमाल और फसलों पर खतरनाक कीटनाशकों का छिड़काव जनता के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट बन चुका है। ऐसे में एक जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस तरह की चेतावनी देना यह साफ करता है कि उपभोक्ताओं को केवल विज्ञापन और प्रचार के झांसे में आने के बजाय अपनी सेहत को लेकर खुद बेहद सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है।


