नई दिल्ली
भारत-चीन को बताया ‘सभ्यता का पालना’, ट्रंप की भाषा पर उठे सवाल
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को लेकर दिए गए कथित ‘नरक’ वाले बयान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। इस बयान पर भारत के समर्थन में ईरान खुलकर सामने आया है और अमेरिका को ही ‘असली जहन्नुम’ करार देते हुए ट्रंप की तीखी आलोचना की है।
हैदराबाद स्थित इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए भारत और चीन को दुनिया की प्राचीन सभ्यताओं का केंद्र बताया। कॉन्सुलेट ने लिखा कि “भारत और चीन सभ्यता के पालने हैं, जबकि असली नरक वह है, जहां का नेतृत्व युद्ध अपराधों के आरोपों से घिरा हुआ है और जो अन्य देशों की सभ्यताओं को नष्ट करने की धमकी देता है।”
ईरान की ओर से यह प्रतिक्रिया उस समय आई है, जब अमेरिकी मीडिया और कंजर्वेटिव टॉक शो में भारत और चीन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां सामने आई थीं। कॉन्सुलेट ने अपने पोस्ट में माइकल सैवेज के शो की ट्रांसक्रिप्ट का भी हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर भारत और चीन को ‘धरती पर नरक’ जैसी जगह बताया गया था।
गौरतलब है कि भारत और चीन दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में शामिल हैं, जिनका इतिहास हजारों वर्षों पुराना है, जबकि अमेरिका का इतिहास लगभग 250 साल पुराना माना जाता है। ईरान ने इसी संदर्भ में अमेरिका की आलोचना करते हुए सभ्यताओं के सम्मान की बात उठाई।
वहीं, मौजूदा समय में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे भारत, चीन और खाड़ी देशों पर दबाव बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी वैश्विक कूटनीति के लिए उचित नहीं है और इससे अमेरिका की वैश्विक छवि पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

