सैकड़ों नागरिकों ने सूर्य को अर्घ्य देकर किया अभिनंदन, लोक कला महोत्सव में झलकी भारतीय संस्कृति

ग्वालियर

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लोक वाद्यों की गूंज के बीच नव संवत्सर का स्वागत, जलविहार में उमड़ा जनसैलाब

रौद्रनाम नव संवत्सर-2083 के स्वागत में गुरुवार को जलविहार प्रांगण सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया। नगर निगम एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित स्वागतोत्सव में लोक वाद्यों की मधुर धुन, पारंपरिक नृत्य और संगीत के बीच नए वर्ष के सूर्य का अभिनंदन किया गया। इस दौरान सैकड़ों नागरिकों ने एक साथ सूर्य की प्रथम किरण को अर्घ्य अर्पित कर नववर्ष का स्वागत किया।
कार्यक्रम दो चरणों में आयोजित हुआ, जिसमें सुबह स्वागतोत्सव एवं इसके बाद लोक कला महोत्सव का आयोजन किया गया। तैरते मंच पर कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के क्रम में बुरहानपुर के कलाकार गजानन वारुडे ने शहनाई वादन से वातावरण को सुरमय बना दिया। राग वैरागी एवं पहाड़ी धुन की प्रस्तुति ने श्रोताओं का मन मोह लिया। बंगाली समाज द्वारा देवी स्तुति पर ‘आगोमनी’ की प्रस्तुति दी गई, जिसमें मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का सजीव मंचन हुआ।
दतिया के कलाकारों ने लोकवाद्य कचहरी के माध्यम से पारंपरिक वाद्ययंत्रों—तुरही, शंख, झालर, नागफनी और इकतारा—की अनूठी संगति प्रस्तुत कर सूर्य का अभिनंदन किया। वहीं रवीन्द्र कुलश्रेष्ठ ने बांसुरी वादन से समां बांध दिया।
नृत्य प्रस्तुतियों में कलाकारों ने पारंपरिक परिधानों में शिव स्तुति और भगवान विष्णु के अवतारों का आकर्षक मंचन किया। युवा कलाकारों द्वारा लांगुरिया और अन्य लोक नृत्यों की ऊर्जावान प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।
इस अवसर पर पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर ने शहरवासियों को नव संवत्सर की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, पार्षद अपर्णा पाटील, संस्कार भारती के संभाग प्रमुख शेखर दीक्षित, महामंत्री चंद्रप्रताप सिकरवार, उमाशंकर कुलश्रेष्ठ, कुलदीप पाठक सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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