लोकल उद्योगों को लोकल सपोर्ट: इंटर्नशिप मॉडल से ग्वालियर में बनेगा नया औद्योगिक समीकरण

ग्वालियर

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औद्योगिक विकास की पारंपरिक सोच से आगे बढ़ते हुए मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) ने ग्वालियर अंचल में एक अनूठा प्रयोग शुरू करने की तैयारी की है। इस पहल के तहत युवाओं को इंटर्नशिप के माध्यम से बड़ी इंडस्ट्रीज और स्थानीय लघु उद्योगों के बीच सेतु बनाया जाएगा। लक्ष्य है—स्थानीय उत्पादन को प्राथमिकता, उद्योगों की लागत में कमी और युवाओं को व्यावहारिक मंच।
:-मॉडल क्या है?:-
एमपीआईडीसी की संचालक अनीशा श्रीवास्तव ने अमिटी विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के इन्क्यूबेशन सेंटर में युवाओं से संवाद कर डेटा एकत्र किया। विश्लेषण में सामने आया कि बड़ी कंपनियां जिन उत्पादों को बाहर से मंगवा रही हैं, वही सामान ग्वालियर के लघु उद्योग पहले से तैयार कर रहे हैं। जानकारी और समन्वय की कमी के कारण यह अंतर बना हुआ है। अब इंटर्नशिप मॉडल के जरिए युवाओं को उद्योगों में जोड़कर मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल स्थापित किया जाएगा।

बड़ी इंडस्ट्रीज को लाभ :-
मालनपुर, सीतापुर और बामौर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की इकाइयों को इस पहल से सीधा फायदा मिलेगा।
– परिवहन लागत में कमी
-समय पर आपूर्ति
-आवश्यकता अनुसार सामग्री उपलब्धता
– उत्पादन खर्च में गिरावट
इससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

लघु उद्योगों के लिए अवसर :-
स्थानीय बाजार मिलने से छोटे उद्योगों को नियमित ऑर्डर प्राप्त होंगे।
. आय में स्थिरता
– उत्पादन क्षमता में विस्तार
– नए रोजगार सृजन
– बाहरी बाजार पर निर्भरता में कमी
यह मॉडल छोटे उद्यमों को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

युवाओं के लिए करियर प्लेटफॉर्म :-
इंटर्नशिप के माध्यम से युवाओं को औद्योगिक प्रक्रियाओं, डेटा विश्लेषण और सप्लाई चेन प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। इससे रोजगार और उद्यमिता के नए द्वार खुलेंगे।

अर्थव्यवस्था को सशक्त आधार:-
यदि यह प्रयोग सफल रहा तो ग्वालियर अंचल में ‘लोकल टू लोकल’ औद्योगिक नेटवर्क विकसित होगा। उद्योग, लघु उद्यम और युवा—तीनों के सहयोग से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त आधार मिलने की उम्मीद|

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