खनियांधाना।
बुंदेलखंड की पावन धरा खनियांधाना में जारी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं त्रयगजरथ महोत्सव के दौरान आज श्रद्धा, समर्पण और वैराग्य का अनूठा त्रिवेणी संगम देखने को मिला। मुनि पुंगव 108 सुधासागर महाराज एवं मुनि 108 श्री निरापद सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में आज श्अयोध्या नगरीश् भक्ति के चरमोत्कर्ष पर रही। मुनिश्री की दिव्य देशना: मंगलमय जीवन का सूत्र, प्रात: काल नित्य पूजन के उपरांत मुनि सुधासागर महाराज ने पांडाल में उपस्थित जनसमूह को अपनी ओजस्वी वाणी से निहाल किया। मुनिश्री ने जीवन में मंगल और अमंगल के सूक्ष्म भेदों को समझाते हुए कहा कि भावों की शुद्धि ही आत्म.कल्याण का एकमात्र मार्ग है। हजारों श्रद्धालुओं ने मंत्रमुग्ध होकर इस ज्ञानरूपी अमृत का पान किया।
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अयोध्या नगरी में उत्सवरू बालक तीर्थंकर की निकली बारात
महाराजा नाभिराय के आंगन में खुशियों का पारावार न रहा, जब बालक तीर्थंकर की भव्य बारात निकाली गई। अयोध्या नगरी् महोत्सव पांडाल में बैंड-बाजों की मधुर धुन पर इंद्र-इंद्राणी और श्रद्धालु जमकर थिरके। सत्येंद्र शर्मा एंड पार्टी के भक्तिमय भजनों ने समूचे वातावरण को ऐसा धर्ममय बनाया कि हर कोई प्रभु भक्ति में सराबोर नजर आया।
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वैराग्य का पथरू संपन्न हुआ पावन तप कल्याणक
महोत्सव का सबसे मर्मस्पर्शी प्रसंग श्तप कल्याणक दीक्षा विधिद्ध संपन्न हुआ। जब बालक तीर्थंकर ने राजसी वैभव को त्याग कर दिगंबर दीक्षा धारण करने हेतु वैराग्य पथ पर कदम बढ़ाएए तो पांडाल श्वैराग्य की जय के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। दीक्षा विधि के इन अलौकिक दृश्यों को देखकर उपस्थित जनसमूह की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं। दोपहर के सत्र में मुनि 108 श्री निरापद सागर जी महाराज का श्पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम अत्यंत भावुक माहौल में संपन्न हुआ। मुनिश्री को नवीन पिच्छिका भेंट करने का परम सौभाग्य भगवान के माता.पिता बनने का गौरव प्राप्त श्री कैलाश चंद दादजी जैन एवं उनके परिवार को प्राप्त हुआ। पुरानी पिच्छिका का त्याग और नवीन संयम उपकरण ग्रहण करने का यह दृश्य श्रद्धालुओं के हृदय को छू गया।
