नई दिल्ली
सोने की कीमत ने हाल ही में लगभग 5,600 डॉलर प्रति औंस का उच्च स्तर बनाया था, लेकिन इसके बाद लगभग 20 फीसदी की गिरावट आई। अब कीमतें 5,000 डॉलर के करीब स्थिर हैं। सिल्वर भी निवेशकों के फोकस में है और 133 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बुल मार्केट के दौरान इस तरह के तेज करेक्शन सामान्य होते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार सोना इस साल 6,000 डॉलर तक जा सकता है। सिल्वर की मांग सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल मेटल भी है। सप्लाई लंबे समय से डिमांड से कम बनी हुई है, जिससे कीमतों में तेज उछाल संभव है। वैश्विक कर्ज तेजी से बढ़कर लगभग 350 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों में कटौती और क्वांटिटेटिव ईजिंग कर सकते हैं। इससे डॉलर पर दबाव बढ़ेगा और करेंसी सप्लाई बढ़ेगी, जो सोने के लिए सकारात्मक संकेत है। रिपोर्ट के अनुसार, माइनिंग कंपनियों के शेयर अभी तक उच्च धातु कीमतों को पूरी तरह वैल्यूएशन में शामिल नहीं कर पाए हैं। यदि कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो माइनिंग स्टॉक्स में तेज रैली देखने को मिल सकती है।
