डबरा
नवग्रह प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का नवां दिन गुरूवार को बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमानजी का दिव्य दरबार लगाया, जिसमें पीड़ित रोते हुए आए और हनुमानजी की कृपा से हंसते हुए गए। इस दौरान प्रेतबाधा से पीड़ित लोगों को बजरंगबली के बल से बाधामुक्त किया गया। हनुमंत कथा के विश्राम दिवस पर पं धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आप भगवान से प्रेम करो ये आस्था है,लेकिन भगवान आपसे प्रेम करे, ये भक्ति है। जो सच्चे मन से भगवान को भजता है, उसे ये दुर्लभ भक्ति प्राप्त हो जाती है। विश्राम दिवस की कथा में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, विधायक संजय पाठक प्रमुख रूप से शामिल हुए।
उन्होंने हजारों लोगों से भरे कथा पांडाल में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आजकल जो कुछ नहीं कर पाता, वो बाबा बन जाता है। भगवा धारण कर और रुद्राक्ष पहनकर बाबा बनना तो सरल है,लेकिन ईश्वर के भजन में खुद को तल्लीन कर बाबा हो जाना कठिन हैं। हनुमानजी से प्रेम करना सरल है,लेकिन हनुमानजी जी आपसे प्रेम करे ये कठिन हैं,ये तभी होता है जब बजरंगबली की कृपा पर किसी प्रकार का संशय नहीं होता। जिस प्रकार बजरंगबली ने श्रीराम की भक्ति बिना किसी संशय के की, वैसे ही आप बजंरगबली से बिना किसी संशय के प्रेम करेंगे तो उनकी भक्ति के बल से आप श्रीराम तक जरूर पहुंच जाएंगे।
गति और मति ठीक रखो, तो जरूर होगी प्रगति…..
बागेश्वर महाराज ने कहा कि संसार के जजों को न्यायाधीश कहते हैं। बागेश्वर हनुमानजी को भी जज कहते हैं। संसार के न्यायधीश भूल कर सकते हैं,लेकिन द्वारिकाधीश कभी भूल नहीं करते हैं।
डॉ नरोत्तम मिश्रा ने किया अभूतपूर्व कार्य
उन्होंने कहा कि अफसरों को कलम फंसने का डर सताता है और नेताओं को कुर्सी जाने का डर सताता है, लेकिन डॉ नरोत्तम मिश्रा के पास तो कुर्सी है ही नहीं। इसके उन्हें किसी का डर नहीं हैं। कुर्सी जाने के बाद वो अभूतपूर्व काम करके दिखाया है, जिसके लिए उन्हें सदियों तक लोग याद करेंगे। कथा विश्राम करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं को हिदायत दी कि यदि आपकी गति और मति ठीक बनी रहे तो आपकी प्रगति को कोई नहीं रोक सकता। फिर कभी समय मिलेगा तो रामकथा सुनाने आएंगे और न दिन नवग्रह पर कथा सुनाएंगे।
नरोत्तम मिश्रा ने माना सभी का आभार…..
कथा विश्राम के बाद कार्यक्रम के मुख्य आयोजक व पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस आयोजन को सफलतापूर्वक करना मेरे अकेले के संभव नहीं था,लेकिन इस आयोजन को अपना समझकर संपूर्ण डबरा नगर की जनता ने तन मन धन से सहयोग किया। देश के शीर्ष राजनेता, मशहूर हस्तियां एवं संत महंतों के साथ अंचल भर के लोगों ने शिरकत कर इसे अभूतपूर्व बना दिया। जिला प्रशासन, नगरीय निकाय, अन्य विभागों के साथ प्रेस मीडिया ने भी इस कार्यक्रम का भरपूर प्रचार-प्रसार किया, जिससे जो लोग डबरा नहीं आ सके, उन्होंने भी इस धर्मगंगा में मानसी डुबकी लगाई।
आज सुबह 11 बजे से होगी
प्राण-प्रतिष्ठा…..
नौ दिनों तक आयोजित हुए नवग्रह शक्ति पीठ प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का शुक्रवार को विधिविधान से समापन होगा। सुबह 11 बजे से मंत्रोचारण के बीच विधिपूर्वक नवग्रह देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य नवग्रह देवताओं को जीवन का संचार करना और श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाना है।
हर दिन डाली गई एक लाख आहूति….
महोत्सव के दौरान, प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ में प्रत्येक ग्रह देवता के लिए हर दिन एक लाख आहुतियाँ डाली गइ। शुक्रवार को यज्ञ शाला में पूर्ण आहुति दी जाएगी, जिससे समस्त यज्ञ का पुण्य सिद्ध होगा और श्रद्धालु अपने जीवन में खुशहाली और प्रगति का अनुभव करेंगे।
कथा प्रसाद के साथ संतों का आशीर्वाद……
महोत्सव के दौरान देशभर के शीर्षस्थ संतों ने अपनी दिव्य वाणी से श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिवमहापुराण की कता सुनाकर श्रद्धालुओं का कल्याण का मार्ग बताया, तो वहीं डॉ. कुमार विश्वास ने अपने अपने राम के माध्यम से बहुत ही सुंदर ढंग से समझाया कि यदि जीवन में राम आ गए, तो फिर आनंंद ही आनंद है। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हनुमंत कथा और दिव्य दरबार लगाकर लोगों को पीड़ा से मुक्ति दिलाई, वहीं दीदी मां साध्वी ऋतुंबरा की वातसल्यमयी वाणी का अमृत भी भक्तों को मिला।
शनि उपासक दांती महाराज ने किया अनुष्ठान…..
शनि उपासक संत दाती महाराज नवग्रह मंदिर परिसर में अपने अनुष्ठान के माध्यम से शनि ग्रह की उपासना कर आयोजन को सार्थकता दी। उन्होंने भक्तों के जीवन से शनि दोष दूर करने के लिए विशेष मंत्रोच्चार किए। उनके आशीर्वचनों ने श्रद्धालुओं में आस्था और भक्ति को और अधिक प्रगाढ़ किया।
लाखों श्रद्धालुओं ने किया जीवन धन्य….
इस महोत्सव के दौरान दी गई आध्यात्मिक शिक्षा और समाज में धार्मिक चेतना का संचार इस क्षेत्र में आने वाले समय तक रहेगा। श्रद्धालुओं ने इस अवसर का लाभ उठाकर अपने जीवन को धन्य किया। इस ऐतिहासिक आयोजन से जो धार्मिक ऊर्जा और आध्यात्मिक जागरूकता पैदा हुई, वह आने वाले वर्षों तक श्रद्धालुओं के दिलों में रहेगी।
