राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर पर उठाए सवाल
गुवाहाटी: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी एक बार फिर अपने सख्त रुख को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनके निशाने पर राजस्थान रॉयल्स के मैनेजर रोमी भिंडर और बीसीसीआई की भ्रष्टाचार रोधी इकाई है।
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान एक दृश्य ने सबका ध्यान खींचा। टीम के मैनेजर रोमी भिंडर खिलाड़ियों के पास डगआउट में बैठकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे। ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीर साझा करते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया और हैरानी जताई। ललित मोदी ने न केवल मैनेजर को आड़े हाथों लिया, बल्कि एंटी-करप्शन यूनिट की मुस्तैदी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:
“मैच के दौरान इस तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। भ्रष्टाचार रोधी अधिकारियों को इस मामले में सजग रहना चाहिए था। यह सीधे तौर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।”
क्या कहते हैं आईपीएल के नियम?
आईपीएल में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए संचार उपकरणों को लेकर बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं:
डगआउट में पाबंदी: मैच के दौरान डगआउट (मैदान के किनारे बैठने की जगह) में मोबाइल फोन या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरण का उपयोग पूरी तरह वर्जित है।
ड्रेसिंग रूम की छूट: टीम मैनेजर और स्टाफ ड्रेसिंग रूम के अंदर फोन का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन डगआउट में वे इसे केवल अपने पास रख सकते हैं, चला नहीं सकते।
उपकरणों को जमा करना/बंद करना: नियमों के अनुसार, स्टेडियम पहुँचते ही खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को अपने मोबाइल फोन और स्मार्टवॉच जैसे उपकरण बंद करने होते हैं।
भ्रष्टाचार का खतरा
मैदान से लाइव सट्टेबाजी और सूचनाओं के आदान-प्रदान को रोकने के लिए ये नियम लागू किए गए हैं। ऐसे में डगआउट में मैनेजर का फोन चलाना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चूक मानी जा रही है। अब देखना यह है कि बीसीसीआई इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।
