दतिया
प्रकृति के नवसिंगर के साथ चैत्र नवरात्र के प्रारंभ का दिन, ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि के निर्माण का दिन, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नव संवत्सर 2083 का उदयीमान भगवान भास्कर को अर्घ देकर भारतीय वैदिक रीति रिवाज मंत्रोच्चार के साथ मनाया गया । संस्कार भारती दतिया द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भारतीय नव संवत्सर श्री जानकी दुलारे मंदिर गंगोटीया हनुमान सीता सागर पर प्रातः 5:00 बजे दतिया के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघ चालक केदार सिंह गुर्जर एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पालिका दतिया के उपाध्यक्ष योगेश सक्सैना ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के पूजन एवं सरस्वती वंदना से हुआ सरस्वती वंदना विनोद एवं साथियों द्वारा प्रस्तुत की गई। अतिथि देवो भव की परंपरागत निर्वाहन करते हुए संस्कार भारती के जिला अध्यक्ष संजय भट्ट ,उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ,साहित्य प्रमुख ऋषि राज मिश्रा द्वारा अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया । कार्यक्रम में दतिया के कलाकारों द्वारा सर्वप्रथम सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ तत्पश्चात संस्कार भारती के सदस्यों द्वारा संस्कार भारती का ध्येय गीत – साध्याति संस्कार भारती भारते नवजीवन प्रस्तुत किया गया बद्री प्रसाद सेन ने बधाई गीत, माधव पुरोहित ,भानु श्रीवास्तव सुंदर भजन प्रस्तुत किए गए। मान सिंह संगीत विश्वविद्यालय ग्वालियर के विराज तोमर ने कथक नृत्य प्रस्तुत किया । इसके पश्चात उपस्थित सभी लोगों द्वारा सूर्य देवता को अर्घ देकर नव संवत्सर 2083 का स्वागत किया गया एवं लोगों ने गले मिलकर एक दूसरे को बधाइयां दी ।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुर्जर साहब ने अपने उद्बोधन में कहा कि सूर्योदय से पूर्व जागना एवं संध्या काल में दीपक जलाना ही सूर्य की सही उपासना है।अगर व्यक्ति चाहता है कि उसकी संतान संस्कार बान हो एवं तेजस्वी बने तो उसे सर्वप्रथम सूर्य की उपासना करना चाहिए एवं सूर्योदय के पूर्व जागना अति आवश्यक है कार्यक्रम का सफल संचालन दीप शिखा मंच दतिया के डायरेक्टर राजेश लिटोरिया द्वारा किया गया आभार प्रदर्शन संस्कार भारती के सचिव कपिल तांबे द्वारा किया गया कार्यक्रम में विशेष रूप से विद्याभारती दतिया के सभी आचार्य एव दीदियों श्रीमती मानसी मुंडोतिया ,एवं सौरभ उपाध्याय नीरज गुगोरिया, अवधेश ओझा ,भानु श्रीवास्तव विक्रम बुंदेला एवं दतिया के प्रबुद्धजन एवं मातृशक्ति उपस्थिति रही। अंत में प्रसाद वितरण के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।
