ATS भोपाल की बड़ी कार्रवाई; इंदौर और भोपाल की निजी जासूसी कंपनियों के साथ मिलकर चल रहा था गोरखधंधा
इंदौर/भोपाल : मध्य प्रदेश पुलिस की साख पर बट्टा लगाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। एटीएस भोपाल ने एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जिसमें पुलिस का एक सहायक उपनिरीक्षक निजी डिटेक्टिव एजेंसियों को आम लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड बेच रहा था। इस मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच के रामपाल सहित दो निजी जासूसों को गिरफ्तार किया गया है।
एटीएस की कार्रवाई में अब तक तीन प्रमुख लोगों को सलाखों के पीछे भेजा गया है
1. रामपाल: एएसआई, इंदौर क्राइम ब्रांच (मुख्य सूत्रधार)।
2. योगेश बेलवाल: संचालक, इंदौर डिटेक्टिव सर्विस।
3. अनिकेत पटेल: संचालक, कर्मा डिटेक्टिव एजेंसी, भोपाल।
कैसे चलता था अवैध ‘डेटा का बाजार’?
जांच में खुलासा हुआ है कि एएसआई रामपाल अपने पद का दुरुपयोग कर किसी भी आधिकारिक केस की जांच का बहाना बनाता था। वह टेलीकॉम कंपनियों से सीडीआर निकलवाने के लिए संदेही के नंबरों के साथ-साथ अन्य निर्दोष लोगों के नंबर भी चुपके से जोड़ देता था।इंदौर डिटेक्टिव सर्विस के साथ 40,000 रुपये में डील हुई थी। भोपाल की कर्मा एजेंसी का अनिकेत पटेल 20,000 रुपये में डिटेल्स उपलब्ध करा रहा था।
एटीएस ने जब इस संदिग्ध नेटवर्क की जांच शुरू की, तो मुकेश तोमर (इंदौर डिटेक्टिव सर्विस) की कॉल डिटेल से पता चला कि वह रोजाना एएसआई रामपाल के संपर्क में था।एटीएस ने पहले रामपाल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसके मोबाइल और लैपटॉप से पता चला कि वह मुकेश और योगेश को सीडीआर की कॉपी देता था। वह दोनों से कई बार फेस टू फेस मिल चुका था। इसके बाद एटीएस ने मामले में इन तीनों को गिरफ्तार कर गहन पूछताछ में लिया है।
