शिवपुरी
सरकार भले ही गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जनपद पंचायत पोहरी की ग्राम पंचायत दोरानी में हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। यहां लाखों रुपये की लागत से बना आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उप स्वास्थ्य केंद्र) ज्यादातर समय बंद रहता है और अब यह “ताला केंद्र” बनकर रह गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह उप स्वास्थ्य केंद्र महीने में महज एक-दो बार ही खुलता है। हालत यह है कि सर्दी-जुकाम, खांसी जैसे सामान्य इलाज के लिए भी लोगों को करीब 20 किलोमीटर दूर पोहरी का रुख करना पड़ता है। आपात स्थिति में तो मरीजों की परेशानी और भी बढ़ जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केंद्र के संचालन के लिए सरकार हर साल बजट जारी कर रही है, तो आखिर जिम्मेदार कर्मचारी कहां हैं? क्या अधिकारियों को इस बदहाली की खबर नहीं, या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखी की जा रही है
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उप स्वास्थ्य केंद्र पर न तो नियमित स्टाफ आता है और न ही दवाइयों की कोई व्यवस्था है। भवन खड़ा है, लेकिन उसमें न सेवा है, न संवेदना, सिर्फ ताला लटक रहा है।
गांव के लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई करते हुए केंद्र को नियमित रूप से खोलने, स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने और दवाइयों की उपलब्धता कराने की मांग की है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर कब तक आंखें मूंदे रहते हैं, या फिर दोरानी के ग्रामीणों को यूं ही इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।
इनका कहना है
मामला संज्ञान में आया है और आज टीकाकरण है और आज यदि उप स्वास्थ केंद्र बंद है तो में जांच करवा लेता हूं यदि कर्मचारियों द्वारा उपस्वास्थ केंद्र नही खोला जा रहा है और लापरवाही की जा रही है तो में कार्यवाही करूंगा
नवल अग्रवाल, बीएमओ पोहरी

