मार्च माह में शेयर बाजार की सबसे बड़ी गिरावट

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बाजार में घबराहट, निवेशकों के लाखों करोड़ डूबे
बाजार में गिरावट बनी रहेगी
मुंबई । ईरान युद्ध के बाद शेयर बाजार में भारी घबराहट देखने को मिल रही है। कोविड के बाद पहली बार इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। शेयर बाजार में मुंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 74564 अंक को छू गया है। जिसके कारण शेयर बाजार को लेकर अर्थशास्त्रियों का यह मानना है। इस गिरावट को रोक पाना, तथा इस घाटे की भरपाई कर पाना फिलहाल संभव नहीं है।
युद्ध को लेकर जिस तरह की स्थिति वैश्विक स्तर पर बन रही है। उसके बाद दुनिया भर में आर्थिक मंदी का खतरा भी देखा जा रहा है। दुनिया भर के सभी शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। मार्च माह के तीनों सप्ताह में शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। मार्च माह के चौथे सप्ताह में भी यह गिरावट बनी रहेगी। शेयर बाजार के लिए कोई बेहतर संकेत हाल फिलहाल देखने को नहीं मिल रहे हैं। निवेशक बाजार में नया निवेश करने के लिए तैयार नहीं हैं,जो निवेश है, उसी को निकाल कर शेयर बाजार से निकलना चाहते हैं। जिसके कारण शेयर बाजार में भगदड़ की स्थिति मची हुई है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है, अमेरिका और इजराइल ने ईरान की समरिक शक्ति और ऊर्जा कारोबार में इस युद्ध का जो प्रभाव पड़ेगा। उसका सही आकलन नहीं किया।जिसके कारण सारी दुनिया में शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है। डोनाल्ड ट्रंप आखिरी वक्त पर इस युद्ध से हट भी जाएं, उसके बाद भी बाजार में गिरावट का सिलसिला बना रहेगा। मार्च माह में 10 फ़ीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिलेगी। ऐसा वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है।
अभी तक शेयर बाजार में छह बार सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 1970 से लेकर 1979 तक 11।3 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। 1980 से 1989 के बीच में 16।09 फीसदी की गिरावट हुई थी। 1990 से 1999 के बीच 23.3 फ़ीसदी की गिरावट हुई थी। 2000 से 2009 के बीच में सबसे ज्यादा 33.3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी। अमेरिका में आई आर्थिक मंदी का सबसे बड़ा असर इसी दौरान दुनिया भर के शेयर बाजारों में पड़ा था।
2010 से 2019 के बीच में 14.5 फ़ीसदी की गिरावट शेयर बाजार में दर्ज हुई थी। जिस तरह की स्थिति वर्तमान में देखने को मिल रही है। उसके अनुसार भारत के शेयर बाजार में सबसे बड़ी गिरावट इस मार्च और अप्रैल माह में देखने को मिल सकती है।
2008 में जिस तरह की अमेरिकी मंदी आई थी। उससे ज्यादा मंदी 2026- 27 में भारत सहित सारी दुनिया के देशों में देखने को मिल सकती है। इसको लेकर दुनिया भर के निवेशकों में घबराहट फैली हुई है। इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच में जो युद्ध चल रहा है। उसमें खाडी के देश बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इस युद्ध में रूस चीन और उत्तर कोरिया के कूद जाने के बाद सारी दुनिया में घबराहट फैल गई है। दो दर्जन से अधिक देश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध में शामिल हो गए हैं। सारी दुनिया के देशों में ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। इसका असर महंगाई पर भी पड़ने लगा है। युद्ध के कारण वैश्विक अर्थ व्यवस्था लड़खड़ा रही है। ऐसे समय पर निवेशको को सावधान रहने की जरूरत है।

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