तीन साल में 32 लाख वाहनों पर किया गया जुर्माना

राज्य

भोपाल

मप्र में सडक़ों पर कैमरे काट रहे चालान

मप्र में ट्रैफिक नियम तोडऩे वालों पर कार्रवाई का तरीका पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। अब सडक़ों पर खड़े पुलिसकर्मियों से ज्यादा कैमरे चालान काट रहे हैं। पिछले तीन साल में प्रदेश में करीब 32.5 लाख ई-चालान जारी हुए हैं और यह संख्या तेजी से बढ़ी है। मध्यप्रदेश समेत देशभर में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर अब ज्यादातर चालान ई-चालान सिस्टम के जरिए किए जा रहे हैं। यह पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें सडक़ पर लगे कैमरे, सॉफ्टवेयर और सरकारी डाटाबेस मिलकर काम करते हैं। पहले जहां पुलिसकर्मी मौके पर रोककर चालान बनाते थे, अब वही काम ऑटोमेटेड सिस्टम कर रहा है।
लोकसभा में पेश किए गए आंकड़े बताते हैं कि एमपी में ई-चालान का आंकड़ा तीन सालों में 20 फीसदी तक बढ़ा है। साल 2023 में मात्र 89,783 ई चालान हुए थे। 2024 में 13,43,771 ई-चालान हुए। वहीं पिछले साल 2025 में यह आंकड़ा बढक़र 18,13,967 पर पहुंच गया है। तीन सालों में कुल 32,47,521 ई-चालान हुए हैं। मप्र में पिछले तीन सालों में कागजी चालान के आंकड़े देखें तो मेन्युअल चालानी कार्रवाई लगभग समाप्ति की ओर नजर आती है। 2023 में 2,983 मेन्युअल चालान हुए थे। वहीं 2024 में ये आंकड़ा घटकर 1,386 पर आ गया। पिछले साल 2025 में मात्र 1,417 कागजी चालान हुए हैं।
सडक़ों पर लगे कैमरों से होते हैं ई-चालान
सिस्टम की शुरुआत सडक़ों और चौराहों पर लगे हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी और एएनपीआर (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) कैमरों से होती है। ये कैमरे 24 घंटे निगरानी करते हैं और जैसे ही कोई वाहन चालक रेड लाइट जंप करता है, ओवरस्पीड करता है या बिना हेलमेट/सीट बेल्ट के चलता है, कैमरा तुरंत उसकी फोटो या वीडियो रिकॉर्ड कर लेता है। इसके बाद सॉफ्टवेयर वाहन की नंबर प्लेट को पढ़ता है और उसे केंद्रीय डेटाबेस वाहन और सारथी पोर्टल से मैच करता है। इससे वाहन मालिक का नाम, पता और मोबाइल नंबर मिल जाता है। इसके बाद सिस्टम अपने आप नियम उल्लंघन के प्रकार के अनुसार चालान जनरेट करता है। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के होती है। चालान बनने के बाद संबंधित वाहन मालिक को एसएमएस के जरिए सूचना मिलती है और वह ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर चालान देख सकता है, भुगतान कर सकता है या जरूरत पडऩे पर उसे चुनौती भी दे सकता है।
गलत चालान हुआ तो दर्ज करा सकते हैं आपत्ति
मध्यप्रदेश में ई-चालान की संख्या तेजी से बढऩे की बड़ी वजह यही है कि शहरों और हाईवे पर कैमरों का नेटवर्क मजबूत हुआ है और ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम को तकनीकी रूप से अपग्रेड किया गया है। अब स्थिति यह है कि सडक़ पर पुलिसकर्मी दिखे या न दिखे, नियम तोडऩे पर चालान कटना लगभग तय है। हालांकि, सरकार ने यह भी व्यवस्था दी है कि अगर किसी को लगता है कि उसका चालान गलत तरीके से काटा गया है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आपत्ति दर्ज कर सकता है और अपने दस्तावेज पेश कर सकता है। जरूरत पडऩे पर कोर्ट में भी अपील का विकल्प मौजूद है।
ये हैं उल्लंघन के मुख्य कारण
रेड लाइट जंप करना, तय गति सीमा से ज्यादा स्पीड में वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया चलाना, कार चलाते समय सीट बेल्ट न लगाना, नो-पार्किंग में वाहन खड़ा करना, गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में ड्राइविंग करना, मोबाइल फोन पर बात करते हुए गाड़ी चलाना, ओवरलोडिंग या ट्रिपल राइडिंग करना, और वैध दस्तावेज न होना जैसे उल्लंघन प्रमुख कारण हैं। सरकार ने यह भी बताया है कि ई-चालान सिस्टम कैमरों और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए इन नियम उल्लंघनों को रिकॉर्ड करता है और उसी आधार पर चालान जारी होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *