कूनो में पहली भारतीय चीता मुखि का मना जन्म दिन

श्योपुर

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03 साल की हुई मुखि, 05 शावको के साथ स्वच्छंद रूप से कर रही विचरण
श्योपुर। जिले के कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता ‘मुखी’ ने आज रविवार को अपने जीवन के तीन साल पूरे कर लिए। भारत में जन्मी पहली मादा चीता के रूप में मुखी अब चीता पुनर्स्थापना परियोजना की सबसे बड़ी ऑइडियल है। रविवार को शाम 04 बजे चीता मॉनिटरिंग टीम ने उसका जन्म दिन मनाया और जंगल में केक काटा है।
मुखी का जन्म मार्च 2023 में उस समय हुआ था, जब नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों को कूनो में बसाने की प्रक्रिया चल रही थी। उस दौरान नए माहौल, मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। जन्म के बाद मुखी की शुरुआत बेहद कठिन रही। उसकी मां ‘ज्वाला’ ने उसे छोड़ दिया था, जबकि उसके भाई-बहन तेज गर्मी के कारण जीवित नहीं रह पाए। ऐसे हालात में वन विभाग की टीम ने मुखी को बचाया और लगातार निगरानी में रखकर उसे पाला। यही कारण है कि आज उसे कूनो की सबसे मजबूत चीता माना जाता है। समय के साथ मुखी ने खुद को पूरी तरह जंगल के माहौल में ढाल लिया है। अब वह एक स्वस्थ वयस्क चीता है और शिकार करने में भी माहिर हो चुकी है। वन अधिकारियों के अनुसार, उसका व्यवहार इस बात का संकेत है कि कूनो का वातावरण चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। मुखी ने 33 महीने की उम्र में नवंबर 2025 में पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। यह भारत में चीतों की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत मानी जा रही है। खास बात यह है कि मुखी अपने शावकों की देखभाल खुद कर रही है, जो जंगल में किसी भी प्रजाति के टिके रहने के लिए बेहद जरूरी है।
वर्जन
चीता मुखि भारत में जन्मी पहली चीता है जो अपनी मां के बिना बड़ी हुई और कूनो के वातावरण में पूरी तरह ढल चुकी है, कठिन परिस्थितियों में उसका जीवित रहना दर्शाता है कि कूनो चीतो के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। मुखि 03 साल की हो गई है जिसके 05 शावक सामान्य व्यवहार दर्शा रहे हैं।
उत्तम कुमार शर्मा
डायरेक्टर, सिंह परियोजना
वर्जन
कूनो में जन्मी पहली चीता मुखि 03 साल की वयस्क चीता बन चुकी है जिसके पांच शावक नवम्बर 2025 में जन्मे थे, जिनकी पूरी देखभाल चीता मुखि कर रही है, उसने अपने व्यवहार, शिकार करने की क्षमता को विकसित कर इस प्रोजेक्ट की सफलता के बडे मायने स्थापित किये है।
आर. थिरूकुरल
डीएफओ कूनो नेशनल पार्क

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