वार-पलटवार: एपस्टीन फाइल्स पर भाजपा ने सिब्बल को घेरा, राहुल गांधी से मांगा जवाब

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नई दिल्ली

अमेरिका के बदनाम फाइनेंशर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद भारत के राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल आ गया है। इस मामले ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नया मोर्चा खोल दिया है, जहां दोनों दल एक-दूसरे पर एपस्टीन से संबंधों के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। शुरुआत में कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को निशाने पर लिया था, लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पर सीधा हमला बोला है।
भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी से जवाब मांगते हुए दावा किया है कि कपिल सिब्बल को एक ऐसे कार्यक्रम में पुरस्कृत किया गया था, जिसे कथित तौर पर जेफ्री एपस्टीन ने फंड किया था। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि साल 2010 में सिब्बल को जो सम्मान मिला, उसका संबंध एपस्टीन की फंडिंग से था। उन्होंने यह भी कहा कि सिब्बल लंबे समय तक गांधी परिवार के करीबी रहे हैं और कांग्रेस की विदेश इकाई के प्रमुख सैम पित्रोदा भी उसी समूह से जुड़े थे। हालांकि, कपिल सिब्बल ने इन दावों को पूरी तरह से बकवास बताते हुए खारिज कर दिया है। कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभालते हुए प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2010 में जब सिब्बल को पुरस्कार दिया गया, तब वह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री थे। उन्हें यह सम्मान शिक्षा में वैश्विक सहयोग के प्रति उनके दृढ़ समर्थन के लिए दिया गया था और इसका जेफ्री एपस्टीन या उसके किसी संदिग्ध नेटवर्क से कोई लेना-देना नहीं है। गौरतलब है कि कपिल सिब्बल ने 2022 में कांग्रेस छोड़ दी थी और वर्तमान में वह समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा सांसद हैं।
इस विवाद की जड़ें तब गहरी हुईं जब एपस्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम सामने आया। कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाते हुए पुरी के इस्तीफे की मांग की और आरोप लगाया कि वह तथ्यों को लेकर झूठ बोल रहे हैं। वहीं, हरदीप सिंह पुरी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पेशेवर काम के सिलसिले में उनकी एपस्टीन से सामान्य जान-पहचान थी, लेकिन एपस्टीन के निजी कृत्यों या अपराधों से उनका कोई सरोकार नहीं रहा है।कुल मिलाकर, सात समंदर पार के एक अपराधी की फाइलों ने भारत में राजनीतिक नैतिकता की बहस को तेज कर दिया है। जहां भाजपा इसे कांग्रेस के पुराने रसूखदारों के अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस इसे वर्तमान सरकार के मंत्रियों की जवाबदेही का प्रश्न बना रही है। दोनों ही दल अब इस अंतरराष्ट्रीय विवाद के जरिए एक-दूसरे की छवि धूमिल करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

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