नई दिल्ली ।सीएनजी गाड़ियों का क्रेज़ भारत मे तेज़ी से बढ़ता जा रहा है आज हर चौथी सीएनजी कार सड़को पर दौड़ रही है तेज़ी से बढ़ती सीएनजी को लोकप्रियता पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण है
भारत के कार बाजार में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। अब खरीदार पहले कितना देती है नहीं, बल्कि कितना बचाती है सवाल पूछ रहे हैं। बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों और कम रनिंग कॉस्ट के कारण सीएनजी विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वित्तीय वर्ष 2026 के आंकड़े बताते हैं कि अब देश में बिकने वाली हर चार में से एक कार सीएनजी पर चलती है। फेडरेशन ऑफ़ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा)के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में देश भर में 47.05 लाख पैसेंजर व्हीकल्स बिकीं, जिनमें लगभग 10.34 लाख सीएनजी कारें थीं। इसका मतलब है कि सीएनजी की हिस्सेदारी अब 22 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि तीन साल पहले यह केवल 12-13 प्रतिशत थी। पेट्रोल का शेयर घटकर 47.48 फीसदी और डीजल का 18.08 फीसदी रह गया है, जबकि इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 4.25 फीसदी हो गई है।
सीएनजी का खर्च प्रति किलोमीटर पेट्रोल से 40-50 फीसदी तक कम है। भले ही सीएनजी कारें 80,000–1,00,000 रुपये महंगी हों, 15,000–20,000 किलोमीटर सालाना चलाने वाले लोग अतिरिक्त लागत 18 महीनों में निकाल लेते हैं। देशभर में सीएनजी पंपों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जिससे महंगे ईंधन की तुलना में सीएनजी भरवाना आसान हो गया है। मारुति, हुंडई और टाटा जैसे ब्रांड फैक्ट्री-फिटेड सीएनजी कारें पेश कर रहे हैं। अब हैचबैक, सेडान और एसयूवी तक सीएनजी पोर्टफोलियो फैल गया है। टाटा ने वित्त वर्ष 26 में 1.72 लाख सीएनजी यूनिट बेचीं, जो सालाना 24 फीसदी की बढ़त है।
