भितरवार
बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि की मार से फसलों में हुआ नुकसान
भितरवार। मध्य प्रदेश के अन्य जिलों की तरह भितरवार विकासखंड मैं तेज हवाओं के साथ अचानक मौसम में बड़ा बदलाव शुक्रवार की सुबह से देखने को मिला है। जहां सुबह करीबन 9 से 10 बजे के बीच बारिश हुई तो वही दिन में बादलों की लुका- छुपी चलती रही तो सांझ ढलने से पहले तेज हवा के साथ मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखा गया और इस दौरान तेज बारिश के साथ अंचल के कई ग्रामों में चने के आकार के ओले गिरने की वजह से अन्नदाता द्वारा दिन-रात पसीना बहाकर जो फसले रवि सीजन की तैयार की गई थी वह कई जगह खेतों में हवा और पानी के साथ गिरे ओलो से खेतों में बिछ गई है। प्रकृति की इस मार से जहां क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान हुआ है। तो दूसरी और अन्नदाता बिगड़ रहे मौसम के मिजाज को लेकर चिंता में डूब गया है।
वैसे तो देखा जाए तो गुरुवार की देर शाम को ही मौसम का मिजाज बदल गया था और रात्रि 8:00 बजे से ही ठंडी हवाएं तेज गति से चलना शुरू हो गई थी, जिससे लोगों को भले ही गर्मी से राहत मिल गई थी लेकिन किसान अचानक बदले मौसम को लेकर चिंतित हो गए थे। लेकिन जब शुक्रवार की सुबह आसमान में बादल छा गए और तकरीबन 9:30 बजे बूंदाबांदी के रूप में बे मौसम बारिश शुरू हो गई। जिसके चलते दिन भर मौसम में नमी के साथ ठंडक भी देखने को मिली। लेकिन शाम को करीबन 5:30 बजे अचानक तेज हवा चली फिर बादलों की गड़गड़ाहट के साथ तेज बारिश शुरू होना शुरू हो गई जिसे देखकर अन्नदाता प्रकृति की इस अनहोनी मार से परेशान हो गया। इस दौरान तेज बारिश के साथ ही भितरवार क्षेत्र के सिंघारन, मसूदपुर,पचौरा,फतेहपुर, मउछ, बनवार, निकोड़ी, ईटमां, छिरेंटा, करियावटी के अलावा घाटीगांव ब्लॉक के बरहाना सहित कई ग्रामों में चने के आकार के ओले गिरने से खेतों में पककर खड़ी गेहूं, चना, मटर,सरसों इत्यादि की फसलों के साथ फल और सब्जी की फसलों में भी नुकसान हुआ है। वही ग्रामीणों के द्वारा बताया जा रहा है कि तकरीबन साढ़े 5 और 6 बजे के बीच तेज ठंडी हवा के साथ ही तेज बारिश हुई और उसी के बीच कुछ जगहों पर 2 मिनट तो कई जगहों पर चार से पांच मिनट तक चने के आकार के ओले गिरे हैं, जिनसे फसलों को नुकसान पहुंचा है।
गेहूं की कटाई और चमक पर पड़ेगा असर
शुक्रवार को अचानक आई मौसम के बदलाव के कारण हुई बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में पक कर खड़ी गेहूं और सरसों की फसल कई ग्रामों में बिछ गई है। जिससे उपरोक्त फसलों की कटाई मै अन्नदाता को परेशानी का सामना करना पड़ेगा तो वही दूसरी और बारिश के कारण गेहूं की फसल पर चमक का भी असर दिखेगा जिसे जो दाम गेहूं के किस को मिलने की आशा थी वह न मिल पाने की समस्या भी अन्नदाता पर उत्पन्न हो गई है,जिसके चलते अन्नदाता चिंता में डूब गया है।
गर्मी के मार्च के बीच बदले मौसम ने फिजाओं में घुली ठंडक
वैसे तो इस वर्ष फरवरी के महीने में ही गर्मी की शुरुआत हो गई थी लेकिन बीच-बीच में मौसम में आए बदलाव के चलते लोगों को फरवरी महीने में शुरु हुई गर्मी से राहत मिलती रही, लेकिन मार्च महीने में होलिका दहन के बाद से एकाएक गर्मी का टेंपरेचर अत्यधिक हो गया और लोगों को जहां दिन में तेज धूप के साथ गर्मी का सामना करना पड़ रहा था तो रात्रि और सुबह के मौसम में भी काफी बदलाव आ गया था। लेकिन मार्च की गर्मी के बीच अचानक मौसम में आए बदलाव से फिजाओं में ठंडक खुल गई है लोगों के जहां कूलर पंखे चालू हो गए थे वह एक बार फिर बंद हो गए और लोग सर्द हवा और बूंदाबांदी के बीच एक बार फिर कंबल और रजाई का सहारा लेने के लिए मजबूर हुए।
