अवैध कॉलोनाइजर, बिल्डर्स और बकायादारों पर सख्त वार: संपत्ति कुर्क कर नीलामी करें, जरूरत पड़े तो भेजें जेल

ग्वालियर

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जिले में बकाया राजस्व वसूली और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध कॉलोनाइजर, बिल्डर्स और बड़े बकायादार यदि बकाया राशि जमा नहीं करते हैं तो उनकी अचल संपत्तियां कुर्क कर नीलाम की जाएं और आवश्यकता पड़ने पर वारंट जारी कर जेल भेजने की कार्रवाई भी की जाए।
रविवार को गूगल मीट के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने डायवर्सन शुल्क, खनिज वसूली, रैरा एक्ट और फूड सेफ्टी एक्ट के तहत की जा रही वसूली की तहसीलवार समीक्षा की। उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को प्रतिदिन का लक्ष्य तय कर अगले 15 दिनों तक विशेष अभियान चलाकर सख्ती से वसूली करने के निर्देश दिए।
बैठक में कलेक्टर ने कहा कि जिन बड़े बकायादारों को कई बार नोटिस देने के बावजूद वे बकाया जमा नहीं कर रहे हैं, उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं और उनकी संपत्तियों को कुर्क कर नीलामी की जाए। खनिज वसूली के मामलों में बकायादारों के वाहन भी जब्त कर नीलाम करने के निर्देश दिए गए।
रैरा एक्ट के तहत बिल्डर्स से वसूली को लेकर भी कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो बिल्डर्स जानबूझकर बकाया भुगतान में देरी कर रहे हैं, उनके खिलाफ विधिवत वारंट जारी कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाए और उनकी संपत्तियों की नीलामी कर बकाया राशि वसूली जाए।
कलेक्टर ने अवैध कॉलोनियों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिन जमीनों के खसरे के कॉलम-12 में अवैध कॉलोनी या कुर्क संपत्ति दर्ज है, उनकी किसी भी स्थिति में रजिस्ट्री नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जिला पंजीयक, उप पंजीयक और सर्विस प्रोवाइडरों की जिम्मेदारी तय की जाए।
इसके साथ ही फूड सेफ्टी एक्ट के तहत जिन फर्मों पर अर्थदंड लगाया गया है, उनसे भी सख्ती से वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं। अपर जिला दंडाधिकारी सी.बी. प्रसाद ने बैठक में बताया कि इस अधिनियम के तहत 2 करोड़ रुपये की वसूली प्रस्तावित है, जिसमें से अब तक 47 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।

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