पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध संकट और महंगे प्रीमियम से निपटने की तैयारी

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निर्यातकों को बड़ी राहत: भारत बनाएगा 10 करोड़ डॉलर का समुद्री बीमा कोष

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री व्यापार पर गहराते संकट को देखते हुए भारत सरकार और बीमा कंपनियां एक बड़ा कदम उठाने जा रही हैं। भारतीय निर्यातकों को युद्ध के जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए 10 करोड़ डॉलर (करीब 840 करोड़ रुपये) का एक विशेष ‘समुद्री बीमा कोष’ बनाने की योजना है।

क्यों पड़ी इस कोष की जरूरत?
* बढ़ता प्रीमियम: मौजूदा तनाव के कारण युद्ध-जोखिम बीमा (War-risk cover) की दरें 0.25% से बढ़कर 1% तक पहुंच गई हैं।
* बीमा कंपनियों की सख्ती: अस्थिरता को देखते हुए कई वैश्विक कंपनियों ने जहाजों का कवर रद्द करने के नोटिस जारी किए हैं।
* व्यापार पर असर: शिपिंग कंपनियां या तो सेवाएं रोक रही हैं या लंबे और महंगे वैकल्पिक मार्गों का चयन कर रही हैं।

इस विशेष फंड का ढांचा इस प्रकार तैयार किया जा रहा है कि संकट के समय भारतीय व्यापार को सहारा मिल सके:
1. प्रबंधन: इस कोष का संचालन जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) द्वारा किया जाएगा।
2. भागीदारी: इसमें देश की अन्य सामान्य बीमा और पुनर्बीमा कंपनियां भी योगदान देंगी।
3. योगदान: कंपनियां फरवरी 2026 तक समुद्री बीमा प्रीमियम का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा इस कोष में डालने पर विचार कर रही हैं।
4. सरकारी गारंटी: सूत्रों के मुताबिक, इस फंड को और अधिक मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार संप्रभु गारंटी (Sovereign Guarantee) देने पर भी विचार कर सकती है।

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