नई दिल्ली
– निफ्टी और सेंसेक्स ने साल की शुरुआत से लगभग 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की
नई दिल्ली । मार्च 2026 में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी कमजोरी देखने को मिली है। बीएसई में सूचीबद्ध 4,270 शेयरों में से 2,234 अपने 52-सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुके हैं। हर पांच में से एक शेयर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गया है। निफ्टी और सेंसेक्स ने साल की शुरुआत से लगभग 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की है। 2024 के उच्चतम स्तर से अब तक कुल बाजार पूंजीकरण में 56 लाख करोड़ रुपये की कमी आ चुकी है। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में युद्ध और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है और सरकार पर सब्सिडी का दबाव बनेगा, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी है। शेयर बाजार में मंदी के बीच दिग्गज ब्रोकरेज हाउसों ने निवेश रणनीति बदल दी है। गोल्डमैन सॉक्स ने ‘डिफेंसिव कंजंप्शन’ और ‘अपस्ट्रीम एनर्जी’ को प्राथमिकता दी है। बैंकों को ‘ओवरवेट’ रखा गया है क्योंकि मजबूत एसेट क्वालिटी और नेट इंटरेस्ट मार्जिन सहारा दे रहे हैं। वहीं ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को ‘अंडरवेट’ किया गया है। आईटी, फार्मा और केमिकल्स पर जोखिम बरकरार है, जबकि ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को ‘मार्केटवेट’ में डाउनग्रेड किया गया है। एचएसबीसी जैसी ब्रोकरेज हाउसें इस मंदी को खरीदारी का अवसर मान रही हैं। लंबे समय तक ऊँचे वैल्यूएशन के बाद शेयर अब अपने दीर्घकालिक औसत के करीब आ गए हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक सुरक्षित क्षेत्रों जैसे बैंकिंग और डिफेंसिव कंजंप्शन सेक्टर्स पर ध्यान दें और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सतर्क रहें।

