लखेश्वरी मेला में उमड़ा आस्था का सैलाब, पहलवानों ने दिखाए दांव-पेच

डबरा/भितरवार

भितरवार

पहलवानों को एसडीओपी तहसीलदार ने किया पुरस्कृत

भितरवार। क्षेत्र के सुप्रसिद्ध प्राचीन लखिया वन स्थित मां लखेश्वरी के दो दिवसीय वार्षिक मेले की शुरुआत रविवार को भक्ति और उत्साह के साथ हुई। सुबह माता रानी की विशेष पूजा-अर्चना कर उन्हें नेगा और चुनरी अर्पित कर मेले का विधिवत शुभारंभ किया गया। मेले के पहले ही दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा मेला परिसर आस्था के रंग में रंगा नजर आया।

मेले में क्षेत्र सहित आसपास के गांवों और विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। वहीं दूसरी ओर मेले में सैकड़ों की संख्या में दुकानदार भी अपनी दुकानें लेकर पहुंचे, जिससे मेले का माहौल पूरी तरह जीवंत हो गया। खिलौने, मिठाई, घरेलू सामान और झूले-चकरी जैसी आकर्षक व्यवस्थाओं ने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को आकर्षित किया।

मेले का मुख्य आकर्षण दंगल प्रतियोगिता रही, जिसमें दूर-दराज के शहरों से आए मल्ल पहलवानों ने अपने दांव-पेच दिखाकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया। कुश्ती के मुकाबलों में पहलवानों ने दमखम और तकनीक का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग अखाड़े के आसपास जमा रहे। हर मुकाबले पर दर्शकों की तालियों और उत्साहवर्धन से माहौल गूंजता रहा। वहीं विजेता पहलवानों को एसडीओपी जितेंद्र नगाइच तहसीलदार धीरज सिंह परिहार नायब तहसीलदार शिवदयाल शर्मा ने कमेटी की तरफ से अतिथि के रूप में पुरस्कृत किया

प्रशासन द्वारा मेले में सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल की तैनाती के साथ ही यातायात और भीड़ नियंत्रण के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। स्वास्थ्य, पेयजल और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई। प्रशासन की सतर्कता के चलते मेले का पहला दिन पूरी तरह शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मां लखेश्वरी का यह मेला क्षेत्र की आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले के दूसरे दिन भी इसी तरह श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर मेले के पहले दिन भक्ति, उत्साह और पारंपरिक खेलों का सुंदर संगम देखने को मिला।

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