भ्रामरी प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी

स्वास्थ्य

नई दिल्ली

हैल्थ विशेषज्ञों के अनुसार, दिन की शुरुआत कुछ मिनट शांत श्वास अभ्यास से की जाए, तो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों में सुधार लाया जा सकता है। इसी कड़ी में भ्रामरी प्राणायाम एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी प्राणायाम माना जाता है। भ्रामरी प्राणायाम को अंग्रेजी में ‘हमिंग बी ब्रीदिंग’ कहा जाता है। इस अभ्यास में सांस छोड़ते समय भंवरे जैसी गूंजती ध्वनि निकाली जाती है, जिससे मन जल्दी शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसका नाम ‘भ्रमर’ यानी काले रंग की मधुमक्खी से लिया गया है, क्योंकि इसमें उत्पन्न ध्वनि उसी के गुंजन जैसी होती है।
यह प्राणायाम योग की उन्नत विधियों में शामिल ‘अष्ट कुंभक’ का हिस्सा है, जिसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथ हाथा योग प्रदिपीका में मिलता है। अष्ट कुंभक में आठ विशेष प्रकार के प्राणायाम बताए गए हैं, जिनका उद्देश्य शरीर की सूक्ष्म ऊर्जा को जागृत करना और श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाना है। मिनिस्ट्री ऑफ आयुष के अनुसार भ्रामरी प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह न केवल वयस्कों बल्कि बच्चों के लिए भी उपयोगी माना जाता है। मंत्रालय के मुताबिक, इस प्राणायाम से उत्पन्न होने वाली ध्वनि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे तनाव, चिंता और क्रोध जैसी समस्याओं में कमी आती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रामरी प्राणायाम के दौरान निकलने वाली गुंजन ध्वनि का प्रतिध्वनि प्रभाव दिमाग को शांत करता है। यह अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और मानसिक तनाव जैसे विकारों को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति की एकाग्रता बढ़ती है और ध्यान लगाने की क्षमता में सुधार होता है।
इसके अलावा, यह प्राणायाम उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जो लगातार मानसिक दबाव या ओवरथिंकिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। दिन में कुछ मिनट इस अभ्यास को करने से मन स्थिर होता है और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग अपनी दिनचर्या में भ्रामरी प्राणायाम को शामिल करें, तो वे न केवल मानसिक शांति पा सकते हैं बल्कि अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को भी बेहतर बना सकते हैं। बता दें कि बदलती जीवनशैली और बढ़ते स्क्रीन टाइम के कारण आजकल लोग कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। सुबह उठते ही मोबाइल या अन्य गैजेट्स में व्यस्त हो जाने की आदत से दिन की शुरुआत तनावपूर्ण हो जाती है।

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