मूक-बधिर छात्रों का शोषण – हाई कोर्ट ने सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पेश जांच रिपोर्ट के बाद फिर से उसे जांच कर सही रिपोर्ट पेश करने को कहा

राज्य

इन्दौर

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगल पीठ ने इस गत 12 जनवरी को मूक-बधिर बच्चों की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार की व्यथा सुनने के बाद मामले में सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए कि वे खुद दौरा करें, बच्चों से मिलकर उनकी समस्याओं को समझें और अपनी रिपोर्ट 3 फरवरी के पहले हाईकोर्ट में पेश करें। कोर्ट के 12 जनवरी के निर्देश पर 13 फरवरी को इस संबंध में रिपोर्ट पेश हुई, जिसमें कहा कि संस्थान में अब कोई गंभीर अव्यवस्था नहीं है और पूर्व की खामियों को दूर किया जा चुका है। इधर शासन ने भी मामले में जवाब दे दिया है। शासन का कहना है कि शिकायतों के आधार पर संचालक ने कार्रवाई की है। कल सुनवाई दौरान कोर्ट ने मूक बधिर बच्चों के संस्थान में उनके साथ हो रहे दुर्व्यवहार के इस मर्मस्पर्शी मामले पर सख्त रूख अपनाते जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव से कहा है कि वे दोबारा जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
बता दें कि आईटीआई में पढ़ने वाले मूक-बधिर बच्चों की और से उनके साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार को लेकर दायर इस याचिका में उनके द्वारा कोर्ट को बताया गया है कि उनके लिए दान में आने वाला सामान यहां (आईटीआई) के लोग ही रख लेते हैं। बाद में उसी सामान को देने के लिए उनसे पैसे मांगे जाते हैं। बच्चों को 2023 से स्टायफंड नहीं दिया जा रहा है। सरकार की योजना के तहत उन्हें लैपटॉप नहीं दिए गए हैं। हॉस्टल में रहने वाले बच्चों से ही बर्तन धुलवाते है और गार्डन का काम करवाया जा रहा है। पढ़ाने के लिए मूक बधिर शिक्षक या दुभाषिया भी नहीं है। 10 मिनट का वीडियो बनाकर उससे ही पढ़ाया जा रहा है। आईटीआई मूक-बधिर केंद्र, इंदौर में मूक-बधिर छात्रों के इस तरह हो रहें शोषण और साथ ही यहां के कुप्रबंधन को इस जनहित याचिका द्वारा कोर्ट के सामने उजागर किया गया था।

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