भितरवार तहसील के चीनोर क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में रविवार को आसमान से ऐसी आफत बरसी, जिसे देखकर ग्रामीण भी सन्न रह गए। कछौआ, भोरी, ररुआ, चीनोर, आंतरी, करहिया, सिकरौदा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों में भीषण ओलावृष्टि हुई। खेतों में फसलों के ऊपर चार-चार इंच तक ओले जम गए, जिससे पूरा इलाका कुछ देर के लिए कश्मीर जैसा नजर आने लगा।
ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी ओलावृष्टि पहले कभी नहीं देखी। बड़े आकार के ओले इतनी तेजी से गिरे कि खड़ी फसलें पलभर में बिछ गईं। गेहूं, सरसों, चना सहित अन्य रबी फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं। कहीं बालियां टूट गईं तो कहीं पौधे जड़ से उखड़ गए।
अन्नदाता किसानों की पीड़ा साफ झलक रही है। महीनों की मेहनत, महंगे बीज, खाद और सिंचाई पर किया गया खर्च एक ही झटके में बर्बाद हो गया। कई किसानों ने बताया कि फसल कटाई के करीब थी और अब घर में अनाज व आमदनी दोनों को लेकर चिंता बढ़ गई है। खेतों में जमी ओलों की परत ने किसानों की उम्मीदों पर भी ठंड की चादर डाल दी है।
ओलावृष्टि से प्रभावित गांवों में नुकसान का आंकलन अभी जारी है, लेकिन किसानों का कहना है कि अधिकांश खेतों में 70 से 100 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस प्राकृतिक आपदा से उबर सकें।
भितरवार क्षेत्र में आसमान से टपकी इस आफत ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मौसम की मार सबसे ज्यादा अन्नदाता किसान ही झेलता है।
