नई दिल्ली
आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में पपीते के पत्तों को कई गंभीर बीमारियों के उपचार में उपयोगी बताया गया है। विशेषकर मानसून के मौसम में फैलने वाली बीमारियों के दौरान इसे किसी प्राकृतिक औषधि से कम नहीं माना जाता। पपीते के पत्तों में मौजूद पपेन और काइमोपपेन जैसे एंजाइम पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे शरीर संक्रमणों से लड़ने में सक्षम बनता है। पपीता जहां अपने स्वाद और पोषण के कारण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है, वहीं इसके पत्ते भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बीमारियों में पपीते के पत्तों का रस काफी प्रभावी माना जाता है। इन बीमारियों के दौरान शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम होने लगती है, जिसे संतुलित करने में पपीते के पत्ते सहायक माने जाते हैं।
यह प्लेटलेट्स के स्तर को सामान्य करने के साथ शरीर में आई कमजोरी को भी दूर करने में मदद करता है। इसके सेवन से लिवर और किडनी की कार्यक्षमता बेहतर होती है, जिससे शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने में सहायता मिलती है और शरीर अधिक स्वस्थ महसूस करता है। जानकारों का यह भी कहना है कि पपीते के पत्तों में एंटी-ट्यूमर और एंटी-कैंसर गुण पाए जाते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा यह शरीर में इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे रक्त में शर्करा की मात्रा संतुलित रहती है और डायबिटीज के मरीजों को राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पपीते के पत्तों का अर्क शरीर में मौजूद पुरानी सूजन को कम करने में भी मददगार होता है, जो कई मेटाबॉलिक बीमारियों की मुख्य वजह मानी जाती है। पपीते के पत्तों के लाभ प्राप्त करने के लिए विशेषज्ञ इसे जूस या काढ़े के रूप में सेवन करने की सलाह देते हैं। ताजे पत्तों को पीसकर निकाला गया रस सुबह खाली पेट लेने से अधिक लाभ मिल सकता है। हालांकि इसकी तासीर गर्म होती है और स्वाद काफी कड़वा होता है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
