शनि जयंती शनि देवता की उपासना दान और उनके आशीर्वाद के लिए सबसे उपयुक्त मानी गई है इस दिन किए दान से शनि देवता प्रसन्न होते है और उनकी कृपा जातक पर बनी रहती है
शनि जयंती को शनि अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनि जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार शनि जयंती 16 मई को है
शनि जयंती न्याय के देवता शनिदेव का जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव के नाम से किए गए दान का पुण्य फल प्राप्त होता है। साथ ही शनि दोष से मुक्ति मिलती है और शनि प्रसन्न होते हैं। अगर आप शनि दोष या दशा के कारण परेशान है तो शनि अमावस्या पर इन चीजों का दान जरूर करें।
शनि जयंती पर काले तिल का दान करें। काले तिल का दान करने से पुराने रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही काली उड़द का दान करने से आर्थिक तंगी कम होती है।
शनि अमावस्या पर छाया दान का भी विशेष महत्व माना गया है। एक कटोरी में सरसों का तेल भर लें अब अपना चेहरा उस तेल में देखें और फिर इस तेल को लेकर जाकर किसी शनि मंदिर या किसी जरूरतमंद को दान कर दें।
शनि जयंती पर जरूरतमंद लोगों को कंबल और जूतों का दान करना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है उन्हें यह दान जरुर करना चाहिए।
शनि जयंती पर लोहे की वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं। लेकिन, इस बात का ख्याल रखें कि शनिवार को दान कर रहे हैं तो लोहे की वस्तु पहले ही खरीद लें शनिवार के दिन इसकी खरीदारी न करें।
शास्त्रों में अन्न दान को महादान कहा गया है। इसलिए इस दिन भूखों को भोजन जरुर कराएं। इसके अलावा सात अलग अलग प्रकार के अनाज का दान भी करना शुभ फलदायी माना गया है।
