केतु के 9 भाव की छाया जो व्यक्ति को अध्यात्म वैराग्य की ओर ले जाता है जिसका कारक पिछला जन्म से जुड़ा माना जाता है
केतु (Ketu) ज्योतिष में एक छाया ग्रह है, जो आध्यात्म, वैराग्य, अचानक घटनाओं और पिछले जन्म के कर्मों से जुड़ा माना जाता है। जब केतु 12 भावों में स्थित होता है, तो हर भाव में उसके अलग-अलग संकेत (निशान) दिखाई देते हैं।
यहाँ 12 भावों में केतु के सामान्य प्रभाव दिए गए हैं:
1. प्रथम भाव (लग्न) : व्यक्ति अंतर्मुखी, रहस्यमयी स्वभाव का होता है,आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव,आध्यात्मिक रुचि अधिक
2. द्वितीय भाव: वाणी में कठोरता या असामान्यता,परिवार से दूरी या मतभेद, धन संचय में बाधा
3. तृतीय भाव: साहसी लेकिन अकेले काम करने की प्रवृत्ति,भाई-बहनों से दूरी, लेखन/कम्युनिकेशन में अलग सोच
4. चतुर्थ भाव: घर-परिवार में अस्थिरता, मां से संबंधों में उतार-चढ़ाव, संपत्ति संबंधी समस्याएं
5. पंचम भाव: प्रेम संबंधों में असफलता या भ्रम, संतान सुख में बाधा, बुद्धि तेज लेकिन अस्थिर
6. षष्ठम भाव: शत्रुओं पर विजय, अचानक बीमारियां, मुकदमों में सफलता
7. सप्तम भाव: वैवाहिक जीवन में दूरी या असंतोष, पार्टनर के साथ गलतफहमियां, बिजनेस पार्टनरशिप में समस्या
8. अष्टम भाव: रहस्यों में रुचि (ज्योतिष, तंत्र), अचानक घटनाएं, दुर्घटना योग, जीवन में बड़े परिवर्तन
9. नवम भाव: भाग्य में उतार-चढ़ाव, गुरु या धर्म से दूरी, विदेश यात्रा के योग
10. दशम भाव: ,करियर में अस्थिरता, अचानक सफलता या गिरावट, पारंपरिक काम से अलग करियर
11. एकादश भाव: आय के अनोखे स्रोत, मित्रों से दूरी या सीमित सर्कल, इच्छाएं पूरी होने में देरी
12. द्वादश भाव: विदेश से जुड़ाव, आध्यात्म और ध्यान में रुचि, खर्च अधिक, एकांत प्रिय
