ये कैसा सीजफायर?

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एयर डिफेंस एक्टिव, होर्मुज बंद, आसमान में ड्रोन
पश्चिम एशिया से एक ओर शांति की उम्मीद जगाने वाली खबर आई, तो दूसरी ओर नए विवादों ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच गुरुवार से 14 दिनों के युद्धविराम का आधिकारिक ऐलान हो गया है। हालांकि, इस घोषणा के 24 घंटे के भीतर ही समझौते की बुनियाद हिलती नजर आ रही है। सबसे बड़ा विवाद लेबनान को लेकर खड़ा हुआ है, जिसे इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है। इजरायल और अमेरिका का स्पष्ट रुख है कि यह सीजफायर केवल ईरान के साथ है, न कि हिजबुल्लाह के खिलाफ। इसी का परिणाम रहा कि सीजफायर लागू होने के दौरान भी इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भीषण हमले किए, जिसमें 250 से अधिक लोगों की जान चली गई।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इन हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि ईरान के 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव में लेबनान में युद्धविराम एक अनिवार्य शर्त थी। ईरान के संसद अध्यक्ष ने इजरायली कार्रवाई को समझौते का उल्लंघन बताते हुए शांति वार्ता को बेतुका करार दिया है। तनाव इतना बढ़ गया है कि ईरान ने सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने का संकेत दिया है। रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस कदम पर टिप्पणी करते हुए होर्मुज को एक प्रभावी हथियार बताया है। होर्मुज के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
युद्धविराम के बीच खाड़ी देशों में भी हलचल तेज है। संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन, कतर और सऊदी अरब ने दावा किया है कि उन्होंने अपनी सीमाओं की ओर बढ़ते ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को इंटरसेप्ट किया है। यूएई के एक गैस प्लांट में आग लगने और नागरिकों के घायल होने की भी खबरें हैं। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति ट्रंप का एक वीडियो साझा कर दावा किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य लक्ष्य पूरे कर लिए गए हैं और उसकी रक्षा क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।
यरुशलम में राहत
इन सबके बीच यरुशलम की अल-अक्सा मस्जिद को 40 दिनों की पाबंदी के बाद नमाजियों के लिए खोल दिया गया है, जिसे एक राहतकारी कदम माना जा रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जब तक एक वास्तविक समझौता नहीं हो जाता, अमेरिकी सेना ईरान के आसपास तैनात रहेगी। यदि वार्ता विफल होती है, तो भविष्य में और भी भीषण हमलों की आशंका बनी हुई है।

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