केनरा बैंक अफसरों से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लिया 33 लाख का लोन

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भोपाल

ईओडब्ल्यू ने ब्रांच मेनेजर, क्रेडिट मेनेजर इंजिनियर सहित 7 के खिलाफ दर्ज की एफआईआर
डिप्टी जनरल मैनेजर ने की थी शिकायत
गिरवी और नीलाम की जा चुकी प्रॉपर्टी को हेराफेरी कर दोबारा गिरवी रखा
भोपाल। केनरा बैंक ( पूर्व में सिडिंकेट बैंक) के इंदौर की नंदा नगर शाखा से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 33 लाख का लोन लेने की शिकायत पर जॉच के बाद ईओडब्ल्यू ने चार लोन लेने के लिये हेराफेरी में शामिल चार आरोपियों और बैंक अधिकारियों सहित सात के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। शातिरो ने बैंक अफसरो क साथ मिलीभगत कर फर्जी संपत्ति दस्तावेजों के आधार पर पूर्व से इण्डियन बैंक में बंधक रखी संपत्ति को दोबारा कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर गिरवी रखा था। जॉच में बैंक अधिकारियों, पेनल एडवोकेट सहित मूल्यांकनकर्ता की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।
डिप्टी जनरल मैनेजर ने की थी शिकायत
विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार आनंद टोटड, डिप्टी जनरल मैनेजर, केनरा बैंक ने लिखित शिकायत करते हुए बताया था की मेसर्स अबु रोड लाइन्स के संचालक करामत खान सहित अन्य ने साल 2017 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिंडीकेट बैंक (वर्तमान केनरा बैंक), नंदा नगर शाखा इन्दौर से 33 लाख का लोन लेकर बैंक को आर्थिक क्षति पहुँचाई है।
– पड़ताल में सामने आई बैंक अधिकारियो की करतूत
जांच में सामने आया की आरोपी द्वारा साल 2016 में केनरा बैंक नंदा नगर शाखा में खाता खोलकर 10 लाख का लोन लिया गया था, और बाद में इस लोन की सीमा बढ़ाने के लिये मकान नंबर 435-ए, ग्रीन पार्क कॉलोनी इन्दौर के फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बैंक में प्रस्तुत किए गए। पेनल एडवोकेट एवं मूल्यांकनकर्ता द्वारा प्रस्तुत की गई गलत रिपोर्ट के आधार पर 21 नंवबर 2017 को 33 लाख का लोन स्वीकृत किया गया। लोन की अदायगी न होने पर 30 दिसंबर 2019 को खाता एनपीए घोषित किया गया और सरफेसी कार्यवाही के दौरान यह बात सामने आई की गिरवी रखी संपत्ति पूर्व से ही इण्डियन बैंक में बंधक थी, और साल 2021 में बैंक द्वारा नीलाम की जा चुकी थी। जांच में बैंक अधिकारियों द्वारा आवश्यक सत्यापन, केवायसी एवं ड्यू डिलिजेंस में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।
– इन अधिकारियो, लेनदारो पर कसा शिंकजा
जॉच के आधार पर विभाग ने लोन लेने वाले मेसर्स अबु रोड लाइन्स के प्रोपेराईटर करामत खान पिता अब्दुल रहमान, प्रॉपर्टी को बंधक रखने वाले रफीक पिता हुसैन मोहम्मद और तात्कालीन ब्रांच मेनेजर जतिन गुप्ता पिता घनश्यामदास गुप्ता, तात्कालीन क्रेडिट मेनेजर कमलेश दरवानी पिता लक्ष्मण दास दरवानी, मूल्यांकनकर्ता इंजिनियर सुनिल जैन पिता ताराचंद जैन और जावेद खान व इरफान खान के खिलाफ धारा 419, 420, 467, 468, 471, 120-बी एवं भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम की धाराओ में मामला कायम कर विवेचना में लिया है।

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